Bewaard in:
| Hoofdauteur: | |
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| Formaat: | Recurso digital |
| Taal: | |
| Gepubliceerd in: |
Zenodo
2025
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| Online toegang: | https://doi.org/10.5281/zenodo.15824770 |
| Tags: |
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Inhoudsopgave:
- <p> गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विद्यालयीन विद्यार्थियों की सीखने की शैली एवं व्यक्तिव पर प्रभाव का अध्ययन</p> <p><strong><span>Mrs. Jayati Sahu<sup>1</sup> & Dr. Shweta Bhatia<sup>2</sup></span></strong></p> <p><strong><sup><span>1</span></sup></strong><strong><span> Research Scholar, <span>Hemchand Yadav University, </span>Durg (C.G.)</span></strong></p> <p><strong><sup><span>2</span></sup></strong><strong><span>HOD (Education Depart.), <span>M.J. College Bhilai (C.G.)</span></span></strong></p> <p><strong><span><span>गुुणवत्तापूर्ण शिक्षा आधुनिक समाज की माँग है और चाहे कोई भी क्षेत्र हो, गुणवत्ता की माँग हर जगह है। गुुणवत्तापूर्ण शिक्षा में उसी शिक्षा का समावेश होता है जो शिक्षा शिक्षण अधिगम में छात्रों की रूचि एवं क्षमता को समझ एवं समाज की आवश्यकताओं की जांच करे और छात्रों की जीविकोपार्जन योग्य बनाए। जब किसी कार्य में उस कार्य से संबंधित सभी गुणों का (व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक) समावेश होता है, तो उसे कार्य की गुुणवत्ता के रूप में देखा व समझा जाता है। प्राणी के विकास में वातावरण की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह लगातार वातावरण के संपर्क में होता है और उससे अनुभव प्राप्त करता है। सीखना चरणों में होता है और प्रत्येक चरण में छात्र अलग-अलग तरीकों से सीखते है। घर स्कूली शिक्षा में उत्पन्न होने वाली कठिनाईयाँ अक्सर सीखने की शैली मंें अंतर के कारण होती है। व्यक्तित्व विकास में वंशानुक्रम व्यक्ति को जन्मजात शक्तियों के सिद्ध करने के लिए सुविधाएँ प्रदान करता है। बालक के व्यक्तित्व पर सामाजिक परिवेश प्रबल प्रभाव डालता है। ज्यो-ज्यों बालक विकसित होता जाता है, वह उस समाज या समुदाय की शैली को आत्मसात कर लेता है जिसमें वह बड़ा होता है। इस प्रकार बालक व्यक्तित्व के आयाम के आधार व्यवहार करता हैं और सीखने की शैली शिक्षा और शिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</span></span></strong></p> <p><strong><span> </span></strong></p>