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Auteur principal: डॉ.ज्योति बाला साहू
Format: Recurso digital
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Publié: Zenodo 2025
Accès en ligne:https://doi.org/10.5281/zenodo.16422667
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Table des matières:
  • <p><strong><span lang="EN">शोध सार - </span></strong><span lang="EN">अद्वैतवाद ऋग्वेद में मिलता है, नासदीय सूक्त इसका सुंदर वर्णन करता है | उपनिषद तो अद्वैतवाद का घर जैसे ही हैं| उपनिषदों ,ब्रह्मसूत्रों तथा गीता पर भाष्य या टीका टिप्पणी लिखने के पूर्व काल में उपनिषदों के सिद्धांतों का बड़ा प्रचार प्रसार हुआ | इन सबको वेदान्त कहा जाता है| आदिशंकर इसके व्याख्याता आचार्य हैं| उपनिषद भाष्य, ब्रह्मसूत्र भाष्य एवं गीता भाष्य प्रामाणिक और उपलब्ध ग्रंथ इन्हीं के द्वारा लिखे गए हैं| हिंदी भक्ति साहित्य पर इनका व्यापक प्रभाव है| संत कवि कबीर ,रैदास तथा इनके अनुयायी अद्वैतवादी कहे जा सकते हैं| आधुनिक काल में स्वामी रामतीर्थ ने इसका प्रचार प्रसार किया, इसी परंपरा के स्वामी रामकृष्ण, स्वामी विवेकानंद ने इसे नई दिशा देते हुए इसके क्षितिज को विस्तारित किया | हिंदी गद्य विधा को नए आयाम देती ‘आदिशंकरम्’ जीवनी विधा की रचना है, जिसमें आदिशंकर का जीवन, अद्वैतदर्शन, तत्कालीन परिवेश, सांस्कृतिक परिदृश्य को समग्रता में जाना समझा जा सकता है|<span>   </span></span></p> <p><span lang="EN"> </span></p> <p><strong><span lang="EN">कुंजी शब्द -</span></strong><span lang="EN"> अद्वैत दर्शन,आचार्य, आध्यात्मिक, अवतारवाद,वेदान्त, मिथक, दर्शनशास्त्र, चिंतन, चांडाल, जीवनी विधा, भक्ति साहित्य, संन्यासी, संत परंपरा |<span>   </span></span></p>