Saved in:
| Main Author: | |
|---|---|
| Format: | Recurso digital |
| Language: | |
| Published: |
Zenodo
2025
|
| Online Access: | https://doi.org/10.5281/zenodo.18099106 |
| Tags: |
Add Tag
No Tags, Be the first to tag this record!
|
Table of Contents:
- <p><span>7 </span><span>वर्ीयष गीर नस्ल की गषय</span><span>, </span><span>तिसने ६ तिन पहले बयषई की थी</span><span>, </span><span>को गषाँव की भैंसोों ने सीोंग मषरकर घषयल कर तियष। िोट मुख्य रूप से आगे के बषएाँ थन पर लगी</span><span>, </span><span>तिससे थन में एक तिद्र बन गयष और वहषाँ से िू ध ररसने लगष। इसके अतिररक्त</span><span>, </span><span>िषाँि के िौरषन यह भी पषयष गयष तक लगभग </span><span>20 </span><span>तिन पुरषनष घषव फषइब्रोतसस के कषरण सख्त हो िुकष थष। गषय को िू ध के नुकसषन और सोंक्रमण के खिरे को िेखिे हुए भषरिीय पशु तितकत्सष अनुसोंधषन सोंस्थषन के पॉलीक्लितनक में लषयष गयष। िषाँि के िौरषन यह पषयष गयष तक थन में बने इस असषमषन्य तिद्र से लगषिषर िू ध कष ररसषव हो रहष है</span><span>, </span><span>तिससे न के वल िू ध की हषतन हो रही थी बक्लि सोंक्रमण </span><span>(Mastitis) </span><span>कष खिरष भी बढ़ गयष थष। गषय हषल ही में ब्यषई होने के कषरण उसकी िुग्ध उत्पषिन क्षमिष उच्च थी</span><span>, </span><span>और यति समय पर उपिषर न तकयष िषिष िो िौथषई कष स्थषयी रूप से नुकसषन होने की सोंभषवनष थी।</span> </p>