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| Autor principal: | |
|---|---|
| Format: | Recurso digital |
| Idioma: | hindi |
| Publicat: |
Zenodo
2026
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| Matèries: | |
| Accés en línia: | https://doi.org/10.5281/zenodo.18507726 |
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Taula de continguts:
- <p><span lang="HI">बुन्देलखण्ड में स्वतन्त्रता संग्राम के लिए अपना सब कुछ लुटा देने वालो में कमी नहीं थी । इन्हीं में से एक थे- ग्राम दान गंगा के भागीरथ बुन्देलखण्ड केसरी क्रांतिवीर दीवान शत्रुघन सिंह जी !</span></p> <p><span lang="HI">सन् </span><em><span lang="EN-US">1857</span></em><span lang="HI"> के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के बाद देश में स्वतन्त्रता के लिये लिए आन्दोलन चलता रहा । महात्मा गांधी के कुशल नेतृत्व में देश में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आन्दोलन चलाया गया । इन आन्दोलनों में बुन्देलखण्डवासियों ने बढ़ चढ कर हिस्सा लिया । इन्ही में<em> </em>स्वतन्त्रता<em> </em>संग्राम सेनानी बुन्देलखण्ड केसरी दीवान शत्रुघन सिंह तथा उनकी पत्नी रानी राजेन्द्र कुमारी की प्रमुख भूमिका रही । जो देश के स्वतन्त्रता संग्राम में अपना योगदान देकर अमर हो गये ! एक छोटा सा गांव मंगरौठ जो बुन्देलखण्ड में उत्तर प्रदेश राज्य के हमीरपुर जिलें में सरीला तहसील के अन्तर्गत आता हैं । <em><span> </span></em>आज भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है । यह भारत का सबसे पहला गांव था जो बिनोवा भावे को ग्राम दान में दिया गया । यह सुझाव मंगरौठ गांव के जमीदार दीवान शत्रुघन सिंह ने विनोबा भावे को ग्राम दान में दिया । दिवान साहब ने अपनी मालकीयत का विसर्जन किया और यह कहते हुए अमर हो गये ।</span></p> <p><em><span lang="EN-US"> </span></em></p> <p><strong><em><span lang="EN-US">" </span></em></strong><strong><span lang="HI">सबै भूमि गोपाल की "</span></strong></p>