Guardat en:
| Autor principal: | |
|---|---|
| Format: | Recurso digital |
| Idioma: | anglès |
| Publicat: |
Zenodo
2026
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| Accés en línia: | https://doi.org/10.5281/zenodo.19614782 |
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Taula de continguts:
- कबीरदास भारतीय संत परंपरा के एक महान कवि, दार्शनिक और समाज-सुधारक थे, जिन्होंने मध्यकालीन भारतीय समाज में व्याप्त धार्मिक आडंबर, जाति-भेद और सामाजिक कुरीतियों का सशक्त विरोध किया। यह शोध-पत्र कबीरदास के मानवतावादी दृष्टिकोण और उनके सामाजिक सुधारों के योगदान का विश्लेषण करता है। कबीर ने अपने दोहों और साखियों के माध्यम से समानता, भाईचारे और सत्य के मार्ग को अपनाने का संदेश दिया। उनका मानना था कि ईश्वर एक है और उसकी प्राप्ति के लिए बाहरी आडंबरों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सच्चे मन और आचरण की जरूरत है। इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि कबीरदास ने न केवल धार्मिक पाखंड का विरोध किया, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा दिया। उनका मानवतावादी दृष्टिकोण आज के आधुनिक समाज में भी प्रासंगिक है, जहाँ समानता और सहिष्णुता की आवश्यकता पहले से अधिक है। इस प्रकार, कबीरदास के विचार समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उन्हें एक उच्चकोटि के मानवतावादी समाज-सुधारक के रूप में स्थापित करते हैं।