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Detaylı Bibliyografya
Yazar: भालेकर, वैभव दत्तात्रय
Materyal Türü: Recurso digital
Dil:
Baskı/Yayın Bilgisi: Zenodo 2026
Konular:
Online Erişim:https://doi.org/10.5281/zenodo.20303113
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İçindekiler:
  • <p class="MsoNormal"><strong><em><span>सारांश</span></em></strong></p> <p class="MsoNormal"><em><span>यह शोध पत्र हिंदी साहित्य और भाषा में निहित मानवीय मूल्यों की परंपरा तथा उनकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। हिंदी साहित्य अपने आरंभ से ही भारतीय सांस्कृतिक चेतना का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रेम, दया, करुणा, सहानुभूति, न्याय, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों का संवाहक रहा है। भक्ति काल से लेकर आधुनिक युग तक विभिन्न साहित्यकारों—जैसे तुलसीदास, कबीर, जयशंकर प्रसाद और अज्ञेय—ने अपने साहित्य के माध्यम से मानवीय मूल्यों को स्थापित और विकसित किया है। यह अध्ययन दर्शाता है कि वैश्वीकरण, उपभोक्तावाद और तकनीकी युग में जहाँ मानवीय संवेदनाएँ कमजोर होती जा रही हैं, वहाँ हिंदी साहित्य इन मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साहित्य न केवल समाज का प्रतिबिंब है, बल्कि वह उसे नैतिक दिशा भी प्रदान करता है। अंततः यह निष्कर्ष निकलता है कि मानवीय मूल्यों का संरक्षण ही समाज के संतुलित विकास और मानवता की स्थापना के लिए अत्यंत आवश्यक है।</span></em></p> <p class="MsoNormal"> </p>