मलिन-बस्तियों की अवस्थिति एवं पर्यावरणीय समस्याऐं-बरेली महानगर का एक भौगोलिक अध्ययन
Fuente:
Zenodo
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| Autores principales: | , |
|---|---|
| Formato: | Recurso digital |
| Lenguaje: | hindi |
| Publicado: |
Zenodo
2024
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| Materias: | |
| Acceso en línea: | |
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| _version_ | 1866901373787832320 |
|---|---|
| author | कुमार, चन्दन कुमार, सुरेश |
| author_facet | कुमार, चन्दन कुमार, सुरेश |
| contents | <p><span>औद्योगिकरण एवं नगरीकरण ने मलिन-बस्तियों की समस्या को जन्म दिया है। तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के कारण नगरीय क्षेत्र में मलिन-बस्तियों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। नगरीय फैलाव के परिणाम स्वरूप मलिन-बस्तियों के भौगोलिक क्षेत्रफल में वृद्धि होती जा रही है। सामान्यतः मलिन-बस्तियों की अवस्थिति यातायात एवं परिवहन सुविधाओं के किनारे</span>, <span>बड़े नालों के किनारे</span>, <span>उद्योग-धन्धों के समीप</span>, <span>सरकारी खाली भूखण्डों तथा अनाधिकृत भूखण्डों पर मलिन-बस्तियों का विस्तार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र से विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किये गये पलायन से नगरों में मलिन-बस्तियों की उत्पत्ति हुई है। नगर के आन्तरिक भाग में मलिन-बस्तियों की संख्या अधिक देखने को मिलती है। मलिन-बस्तियों में स्वच्छता का अभाव होने के कारण गन्दगी का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है</span>, <span>जिस कारण यहां पर विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं का जन्म हुआ है। शौचालय</span>, <span>पेयजल तथा स्वच्छता का यहां पर निम्न स्तर देखने को मिलता है। छोटे-छोटे आवासों में कई परिवार देखने को मिलते हैं। साक्षरता का निम्न स्तर तथा बेरोजगारी के कारण गरीबी का स्तर उच्च पाया जाता है। निम्न आय होने के कारण खान-पान एवं रहन-सहन का स्तर निम्न बना हुआ है। कूड़ा प्रबन्धन की समस्या ने यहां पर विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है</span>, <span>जिसने मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाला है।</span></p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_14222504 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2024 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | मलिन-बस्तियों की अवस्थिति एवं पर्यावरणीय समस्याऐं-बरेली महानगर का एक भौगोलिक अध्ययन कुमार, चन्दन कुमार, सुरेश मलिन-बस्तियां, पर्यावरणीय समस्याऐं, मूलभूत सुविधाऐं, अवस्थिति, प्रभाव, परिवर्तन। <p><span>औद्योगिकरण एवं नगरीकरण ने मलिन-बस्तियों की समस्या को जन्म दिया है। तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के कारण नगरीय क्षेत्र में मलिन-बस्तियों की जनसंख्या में वृद्धि हो रही है। नगरीय फैलाव के परिणाम स्वरूप मलिन-बस्तियों के भौगोलिक क्षेत्रफल में वृद्धि होती जा रही है। सामान्यतः मलिन-बस्तियों की अवस्थिति यातायात एवं परिवहन सुविधाओं के किनारे</span>, <span>बड़े नालों के किनारे</span>, <span>उद्योग-धन्धों के समीप</span>, <span>सरकारी खाली भूखण्डों तथा अनाधिकृत भूखण्डों पर मलिन-बस्तियों का विस्तार हुआ है। ग्रामीण क्षेत्र से विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किये गये पलायन से नगरों में मलिन-बस्तियों की उत्पत्ति हुई है। नगर के आन्तरिक भाग में मलिन-बस्तियों की संख्या अधिक देखने को मिलती है। मलिन-बस्तियों में स्वच्छता का अभाव होने के कारण गन्दगी का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है</span>, <span>जिस कारण यहां पर विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं का जन्म हुआ है। शौचालय</span>, <span>पेयजल तथा स्वच्छता का यहां पर निम्न स्तर देखने को मिलता है। छोटे-छोटे आवासों में कई परिवार देखने को मिलते हैं। साक्षरता का निम्न स्तर तथा बेरोजगारी के कारण गरीबी का स्तर उच्च पाया जाता है। निम्न आय होने के कारण खान-पान एवं रहन-सहन का स्तर निम्न बना हुआ है। कूड़ा प्रबन्धन की समस्या ने यहां पर विभिन्न प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं को जन्म दिया है</span>, <span>जिसने मानव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाला है।</span></p> |
| title | मलिन-बस्तियों की अवस्थिति एवं पर्यावरणीय समस्याऐं-बरेली महानगर का एक भौगोलिक अध्ययन |
| topic | मलिन-बस्तियां, पर्यावरणीय समस्याऐं, मूलभूत सुविधाऐं, अवस्थिति, प्रभाव, परिवर्तन। |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.14222504 |