कृषि यंत्रीकरण का कृषि एवं अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
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Zenodo
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| Autore principale: | |
|---|---|
| Natura: | Recurso digital |
| Lingua: | hindi |
| Pubblicazione: |
Zenodo
2025
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| Soggetti: | |
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| _version_ | 1866901650744016896 |
|---|---|
| author | वीनिता कुमारी |
| author_facet | वीनिता कुमारी |
| contents | <p>भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वतंत्रता प्राप्ति एवं आर्थिक नियोजन के 60 वर्ष पश्चात् भी कृषि क्षेत्र का सर्वोपरि महत्व है। आज भी भारत में व्यवसाय और जीविका की दृष्टि से 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि क्षेत्र पर निर्भर है, यद्यपि आर्थिक विकास के ऊँचे लक्ष्यों की प्राप्ति के कारण आज भारत की कुल राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र का अंशदान क्रमशः घटा है। औद्योगिक क्षेत्र का अंशदान बढ़ा है तथा सभी क्षेत्रों में संरचनात्मक विकास होने के कारण सेवा क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में योगदान सर्वाधिक हुआ है। इन सब विकासात्मक क्रियाओं के बावजूद वर्तमान कृषि क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड बना हुआ है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के विकास संबंधी, अधिकांश, परियोजनाऐं और कार्यक्रम कृषि अर्थव्यवस्था के कायापलट करने के उद्देश्य से निर्मित और क्रियान्वित की जाती है। इसका मुख्य कारण यह है, कि भारतीय कृषि आज भी पूर्णतया आधुनिक और विकसित नहीं हो सका है, और संपूर्ण विकास की वार्षिक दर पिछले 50 वर्षों में अनुमानतः 2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक सीमित रही है। इसके अतिरिक्त देश की औद्योगिक विकास की दर 7 प्रतिशत से 11 प्रतिशत तक औसतन रहा है। अतः भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में व्यापक और क्रांतिकारी सुधार करने की नितांत आवश्यकता है। इस दिशा में 1660-70 के दशक में हरित क्रांति का एक नया युग आया, जिसने कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकी ज्ञान का समावेश एवं विभिन्न आदाओं जैसे- सिंचाई, उन्नत बीज, रासायानिक खाद और पौध संरक्षण के अंतर्गत कीटनाशक दवाइयों तथा नवीन कृषि यंत्रीकरण के अधिकाधिक उपयोग से समग्र कृषि उत्पादन और अधिकांश फसलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में तीव्र वृद्धि लाने में एक नयी सफलता अर्जित की। अब कृषि क्षेत्र में नवीन आविष्कार, खोज, अनुसंधान एवं तकनीकी ज्ञान के वैज्ञानिक उपयोग का एक अनवरत सिलसिला प्रारंभ हो चुका है।</p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_14601527 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | कृषि यंत्रीकरण का कृषि एवं अर्थव्यवस्था पर प्रभाव वीनिता कुमारी भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक नियोजन, आर्थिक विकास, संरचनात्मक विकास, राष्ट्रीय आय, कृषि अर्थव्यवस्था <p>भारतीय अर्थव्यवस्था में स्वतंत्रता प्राप्ति एवं आर्थिक नियोजन के 60 वर्ष पश्चात् भी कृषि क्षेत्र का सर्वोपरि महत्व है। आज भी भारत में व्यवसाय और जीविका की दृष्टि से 65 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या कृषि क्षेत्र पर निर्भर है, यद्यपि आर्थिक विकास के ऊँचे लक्ष्यों की प्राप्ति के कारण आज भारत की कुल राष्ट्रीय आय में कृषि क्षेत्र का अंशदान क्रमशः घटा है। औद्योगिक क्षेत्र का अंशदान बढ़ा है तथा सभी क्षेत्रों में संरचनात्मक विकास होने के कारण सेवा क्षेत्र का राष्ट्रीय आय में योगदान सर्वाधिक हुआ है। इन सब विकासात्मक क्रियाओं के बावजूद वर्तमान कृषि क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का मेरुदण्ड बना हुआ है। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के विकास संबंधी, अधिकांश, परियोजनाऐं और कार्यक्रम कृषि अर्थव्यवस्था के कायापलट करने के उद्देश्य से निर्मित और क्रियान्वित की जाती है। इसका मुख्य कारण यह है, कि भारतीय कृषि आज भी पूर्णतया आधुनिक और विकसित नहीं हो सका है, और संपूर्ण विकास की वार्षिक दर पिछले 50 वर्षों में अनुमानतः 2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक सीमित रही है। इसके अतिरिक्त देश की औद्योगिक विकास की दर 7 प्रतिशत से 11 प्रतिशत तक औसतन रहा है। अतः भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में व्यापक और क्रांतिकारी सुधार करने की नितांत आवश्यकता है। इस दिशा में 1660-70 के दशक में हरित क्रांति का एक नया युग आया, जिसने कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकी ज्ञान का समावेश एवं विभिन्न आदाओं जैसे- सिंचाई, उन्नत बीज, रासायानिक खाद और पौध संरक्षण के अंतर्गत कीटनाशक दवाइयों तथा नवीन कृषि यंत्रीकरण के अधिकाधिक उपयोग से समग्र कृषि उत्पादन और अधिकांश फसलों की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में तीव्र वृद्धि लाने में एक नयी सफलता अर्जित की। अब कृषि क्षेत्र में नवीन आविष्कार, खोज, अनुसंधान एवं तकनीकी ज्ञान के वैज्ञानिक उपयोग का एक अनवरत सिलसिला प्रारंभ हो चुका है।</p> |
| title | कृषि यंत्रीकरण का कृषि एवं अर्थव्यवस्था पर प्रभाव |
| topic | भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक नियोजन, आर्थिक विकास, संरचनात्मक विकास, राष्ट्रीय आय, कृषि अर्थव्यवस्था |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.14601527 |