लोककाव्यों में वर्णित स्वाधीनता संग्राम के क्षेत्रीय क्रांतिकारी (हिंदी प्रदेश की कुछ बोलियों के लोककाव्यों के संदर्भ में)
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Zenodo
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| Format: | Recurso digital |
| Veröffentlicht: |
Zenodo
2022
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| _version_ | 1866901689303302144 |
|---|---|
| author | Suresh Kumar Prajapati |
| author_facet | Suresh Kumar Prajapati |
| contents | <p> हिंदी की विभिन्न बोलियों में ऐसे अनेक लोकगीत मिलते हैं जिनमें अपने ऐतिहासिक वीर-पुरुषों एवं लोकनायकों की गौरवगाथा को अभिव्यक्त किया गया है। इन लोकगीतों के निनाद ने स्वाधीनता संग्राम के दिनों में जुझारू युवा पीढ़ी से लेकर प्रौढ़ों तक में राष्ट्रप्रेम जाग्रत किया, जिससे वे राष्ट्र के लिए प्राण तक निछावर करने को उद्यत हुए। अँगरेजी कुशासन के विरुद्ध देश को खड़ा करने में लोककाव्यों के विविध रूपोंगल लोकगीतों, गीतों, कविताओं, लोकगाथाओं आदि की विशिष्ट भूमिका रही है। इनमें स्वाधीनता के उन रणबांकुरों के पराक्रम, शौर्य और क्रियाकलापों का वर्णन है जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता की मजबूत नींव को हिलाकर साम्राज्यवादियों को अहसास दिलाया कि भारत पर लंबे समय तक शासन कर पाना आसान नहीं है।</p> <p>- सुरेश कुमार प्रजापति</p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_15382418 |
| institution | Zenodo |
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| publishDate | 2022 |
| publisher | Zenodo |
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| spellingShingle | लोककाव्यों में वर्णित स्वाधीनता संग्राम के क्षेत्रीय क्रांतिकारी (हिंदी प्रदेश की कुछ बोलियों के लोककाव्यों के संदर्भ में) Suresh Kumar Prajapati लोक लोक साहित्य राष्ट्रीय चेतना और लोक साहित्य <p> हिंदी की विभिन्न बोलियों में ऐसे अनेक लोकगीत मिलते हैं जिनमें अपने ऐतिहासिक वीर-पुरुषों एवं लोकनायकों की गौरवगाथा को अभिव्यक्त किया गया है। इन लोकगीतों के निनाद ने स्वाधीनता संग्राम के दिनों में जुझारू युवा पीढ़ी से लेकर प्रौढ़ों तक में राष्ट्रप्रेम जाग्रत किया, जिससे वे राष्ट्र के लिए प्राण तक निछावर करने को उद्यत हुए। अँगरेजी कुशासन के विरुद्ध देश को खड़ा करने में लोककाव्यों के विविध रूपोंगल लोकगीतों, गीतों, कविताओं, लोकगाथाओं आदि की विशिष्ट भूमिका रही है। इनमें स्वाधीनता के उन रणबांकुरों के पराक्रम, शौर्य और क्रियाकलापों का वर्णन है जिन्होंने ब्रिटिश सत्ता की मजबूत नींव को हिलाकर साम्राज्यवादियों को अहसास दिलाया कि भारत पर लंबे समय तक शासन कर पाना आसान नहीं है।</p> <p>- सुरेश कुमार प्रजापति</p> |
| title | लोककाव्यों में वर्णित स्वाधीनता संग्राम के क्षेत्रीय क्रांतिकारी (हिंदी प्रदेश की कुछ बोलियों के लोककाव्यों के संदर्भ में) |
| topic | लोक लोक साहित्य राष्ट्रीय चेतना और लोक साहित्य |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.15382418 |