कृषि में नवाचार करते कृषि विज्ञान केंद्र

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Auteur principal: Gajendra Singh 'Madhusudan'
Format: Recurso digital
Publié: Zenodo 2018
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_version_ 1866901577888956416
author Gajendra Singh 'Madhusudan'
author_facet Gajendra Singh 'Madhusudan'
contents <p><span lang="HI">अपनी परंपरागत प्रकृति के कारण हमारी कृषि और ग्रामीण समुदाय एक साथ दोहरी समस्या का सामना कर रहे हैं। जहां कृषि में अपेक्षित उद्यमशीलता का अभाव रहा है</span><span>, </span><span lang="HI">वहीं ग्रामीण समुदाय में तकनीकी हुनर में कमी के कारण बेरोजगारी की मार भी हावी रही है, जिसके कारण हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सकारात्मक प्रभावों की अपेक्षा नकारात्मक प्रभावों का अधिकता से सामना करना पड़ा हैं। इसलिए इन नकारात्मक प्रभावों के शमन के लिए ऐसी रणनीतियों को विकसित करने की जरूरत है जिनसे संवेदनशील क्षेत्रों एवं सुभेद्द समूहों में संवेदनशीलता का सामना करने वाली रणनीतियों को अपनाने में मदद मिल सके। कृषि विज्ञान केंद्र</span><span>, </span><span lang="HI">केंद्र सरकार की ऐसी ही एक कोशिश है ताकि देश के हर गांव में वैज्ञानिक विधि से कृषकों का कल्याण किया जा सके। ये तकनीकी अनुप्रयोगों के विज्ञान-आधारित संस्थान हैं जिनमें किसानों व हितधारकों को विविधीकृत और बहुआयामी प्रशिक्षण दिए जाते हैं जोकि किसानों व ग्रामीण समुदायों को स्वावलंबी बनाने में सहायक होने के साथ उनको तकनीकी ज्ञान भी प्रदान करते हैं। यदि किसी व्यवस्था को उन्नतशील बनाना है तो उसमें नवप्रवर्तनों का होना आवश्यक है। नवप्रवर्तनों की इसी भूमिका के उपयोग के लिए देश में केवीके का नेटवर्क तैयार किया गया है ताकि यथासमय कृषि क्षेत्र का कायाकल्प किया जा सके। </span></p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_16731233
institution Zenodo
language
publishDate 2018
publisher Zenodo
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spellingShingle कृषि में नवाचार करते कृषि विज्ञान केंद्र
Gajendra Singh 'Madhusudan'
<p><span lang="HI">अपनी परंपरागत प्रकृति के कारण हमारी कृषि और ग्रामीण समुदाय एक साथ दोहरी समस्या का सामना कर रहे हैं। जहां कृषि में अपेक्षित उद्यमशीलता का अभाव रहा है</span><span>, </span><span lang="HI">वहीं ग्रामीण समुदाय में तकनीकी हुनर में कमी के कारण बेरोजगारी की मार भी हावी रही है, जिसके कारण हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सकारात्मक प्रभावों की अपेक्षा नकारात्मक प्रभावों का अधिकता से सामना करना पड़ा हैं। इसलिए इन नकारात्मक प्रभावों के शमन के लिए ऐसी रणनीतियों को विकसित करने की जरूरत है जिनसे संवेदनशील क्षेत्रों एवं सुभेद्द समूहों में संवेदनशीलता का सामना करने वाली रणनीतियों को अपनाने में मदद मिल सके। कृषि विज्ञान केंद्र</span><span>, </span><span lang="HI">केंद्र सरकार की ऐसी ही एक कोशिश है ताकि देश के हर गांव में वैज्ञानिक विधि से कृषकों का कल्याण किया जा सके। ये तकनीकी अनुप्रयोगों के विज्ञान-आधारित संस्थान हैं जिनमें किसानों व हितधारकों को विविधीकृत और बहुआयामी प्रशिक्षण दिए जाते हैं जोकि किसानों व ग्रामीण समुदायों को स्वावलंबी बनाने में सहायक होने के साथ उनको तकनीकी ज्ञान भी प्रदान करते हैं। यदि किसी व्यवस्था को उन्नतशील बनाना है तो उसमें नवप्रवर्तनों का होना आवश्यक है। नवप्रवर्तनों की इसी भूमिका के उपयोग के लिए देश में केवीके का नेटवर्क तैयार किया गया है ताकि यथासमय कृषि क्षेत्र का कायाकल्प किया जा सके। </span></p>
title कृषि में नवाचार करते कृषि विज्ञान केंद्र
url https://doi.org/10.5281/zenodo.16731233