कबीर और सूरदास का लोककाव्य पर प्रभाव
Fuente:
Zenodo
Guardado en:
| Autor principal: | |
|---|---|
| Formato: | Recurso digital |
| Lenguaje: | hindi |
| Publicado: |
Zenodo
2025
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| Materias: | |
| Acceso en línea: | |
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| _version_ | 1866902262239985664 |
|---|---|
| author | Patel, Manish |
| author_facet | Patel, Manish |
| contents | <p><span lang="HI">भारतीय भक्ति आंदोलन के दो महान कवि कबीर और सूरदास ने अपने कालजयी काव्य से लोककाव्य पर गहरा और बहुआयामी प्रभाव डाला है। यह शोध-पत्र इसी प्रभाव का एक विस्तृत</span>, <span lang="HI">विश्लेषण</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन लोकगीतों</span>, <span lang="HI">कहावतों</span>, <span lang="HI">मुहावरों और लोक कथाओं के साहित्यिक और सांस्कृतिक पाठों का गहराई से</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">पाठ विश्लेषण<strong> </strong>करता है। इसके लिए</span>, <span lang="HI">कबीर और सूरदास की रचनाओं के साथ-साथ संकलित लोक साहित्य का भी अध्ययन किया गया है। यह शोध सिद्ध करता है कि, इन कवियों का प्रभाव केवल साहित्यिक नहीं है</span>, <span lang="HI">बल्कि यह लोकमानस</span>, <span lang="HI">सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से समाहित है। इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि, उनका प्रभाव पहले के अनुमानों से कहीं अधिक</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">व्यापक और गहन</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">है</span>, <span lang="HI">जिसे यहाँ अधिक प्रभावी ढंग से समझा जा सकता है।</span></p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_17073127 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | कबीर और सूरदास का लोककाव्य पर प्रभाव Patel, Manish (4-(m-Chlorophenylcarbamoyloxy)-2-butynyl)trimethylammonium Chloride <p><span lang="HI">भारतीय भक्ति आंदोलन के दो महान कवि कबीर और सूरदास ने अपने कालजयी काव्य से लोककाव्य पर गहरा और बहुआयामी प्रभाव डाला है। यह शोध-पत्र इसी प्रभाव का एक विस्तृत</span>, <span lang="HI">विश्लेषण</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन लोकगीतों</span>, <span lang="HI">कहावतों</span>, <span lang="HI">मुहावरों और लोक कथाओं के साहित्यिक और सांस्कृतिक पाठों का गहराई से</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">पाठ विश्लेषण<strong> </strong>करता है। इसके लिए</span>, <span lang="HI">कबीर और सूरदास की रचनाओं के साथ-साथ संकलित लोक साहित्य का भी अध्ययन किया गया है। यह शोध सिद्ध करता है कि, इन कवियों का प्रभाव केवल साहित्यिक नहीं है</span>, <span lang="HI">बल्कि यह लोकमानस</span>, <span lang="HI">सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से समाहित है। इस अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि, उनका प्रभाव पहले के अनुमानों से कहीं अधिक</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">व्यापक और गहन</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">है</span>, <span lang="HI">जिसे यहाँ अधिक प्रभावी ढंग से समझा जा सकता है।</span></p> |
| title | कबीर और सूरदास का लोककाव्य पर प्रभाव |
| topic | (4-(m-Chlorophenylcarbamoyloxy)-2-butynyl)trimethylammonium Chloride |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.17073127 |