आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज

Fuente: Zenodo
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Autor principal: सुप्रिता कासुते
Formato: Recurso digital
Lenguaje:hindi
Publicado: Zenodo 2025
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author सुप्रिता कासुते
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contents <p>साहित्य में प्रचलित प्रत्येक अवधारणा का अपने समाज के साथ गहरा संबंध होता है। हिंदी साहित्य के विशेष संदर्भ में बात की जाए तो आधुनिक काल से लेकर भक्तिकाल, रीत काल, छायावादी युग, प्रगतिवादी युग एवं प्रयोगवादी युग आदि धाराओं का अपना एक सामाजिक महत्त्व कहा जाता है। अर्थात यदि देखा जाए तो साहित्य को समाज की प्रतिकृति या प्रतिरूप माना जाना चाहिए। परन्तु आधुनिक साहित्य और समाज के संबंध की बात जब हम लोग करते हैं तो हमारे सामने एक बात मुख्य रूप से उपस्थित होती है कि हम साहित्यकार से जिस सामाजिक यथार्थ के प्रस्तुत करने की आशा से आधुनिक साहित्य की कल्पना करते हैं।</p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_17264050
institution Zenodo
language hin
publishDate 2025
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज
सुप्रिता कासुते
आधुनिक हिंदी साहित्य
समाज परिवर्तन
साहित्य और समाज संबंध
गद्य का विकास
राष्ट्रीय चेतना
<p>साहित्य में प्रचलित प्रत्येक अवधारणा का अपने समाज के साथ गहरा संबंध होता है। हिंदी साहित्य के विशेष संदर्भ में बात की जाए तो आधुनिक काल से लेकर भक्तिकाल, रीत काल, छायावादी युग, प्रगतिवादी युग एवं प्रयोगवादी युग आदि धाराओं का अपना एक सामाजिक महत्त्व कहा जाता है। अर्थात यदि देखा जाए तो साहित्य को समाज की प्रतिकृति या प्रतिरूप माना जाना चाहिए। परन्तु आधुनिक साहित्य और समाज के संबंध की बात जब हम लोग करते हैं तो हमारे सामने एक बात मुख्य रूप से उपस्थित होती है कि हम साहित्यकार से जिस सामाजिक यथार्थ के प्रस्तुत करने की आशा से आधुनिक साहित्य की कल्पना करते हैं।</p>
title आधुनिक हिंदी साहित्य और समाज
topic आधुनिक हिंदी साहित्य
समाज परिवर्तन
साहित्य और समाज संबंध
गद्य का विकास
राष्ट्रीय चेतना
url https://doi.org/10.5281/zenodo.17264050