आरम्भ (The Beginning)
Fuente:
Zenodo
Guardado en:
| Autor principal: | |
|---|---|
| Formato: | Recurso digital |
| Lenguaje: | hindi |
| Publicado: |
Zenodo
2025
|
| Acceso en línea: | |
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| _version_ | 1866901233096196096 |
|---|---|
| author | SUDHANSHU KUMAR |
| author_facet | SUDHANSHU KUMAR |
| contents | <p>आरम्भ (The Beginning) एक आध्यात्मिक विज्ञान-गल्प (spiritual science fiction) उपन्यास है जो समय, प्रेम और चेतना के तीनों आयामों को जोड़ता है। यह कथा डॉ. सुधांशु कुमार द्वारा रचित है और इसमें इतिहास, अध्यात्म तथा आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम दिखाई देता है। कहानी का केंद्र एक ही आत्मा के पुरुष-रूपी और स्त्री-रूपी चेतना हैं जो सृष्टि के आरम्भ से हर काल खंड में कभी ऊर्जारूप में तो कभी मानवरूप में पृथ्वी पर आते हैं। आधुनिक अध्यात्म की भाषा में इन्हे जुड़वाँ आत्मा (Twin Flame) कहा जाता हैं, एक दिव्य-पुरुष (Divine Masculine) और दूसरा दिव्य-स्त्री (Divine Feminine) रूप—जो अनादि काल से एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। एक ही आत्मा के ये दोनों रूप अनेक युगों और जन्मों में जन्म लेकर एक-दूसरे की ओर आकर्षित होती रही हैं, परंतु किसी जन्म में कर्मिक बंधन या परिस्थिति के कारण उनका मिलन अधूरा रह जाता है। कुछ जन्म ऐसे भी हैं जब एक ही आत्मा के दोनों मानव शरीर, दिव्य-पुरुष (Divine Masculine) और दूसरा दिव्य-स्त्री (Divine Feminine) रूप एक दूसरे से विवाह करते हैं।</p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_17292692 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | आरम्भ (The Beginning) SUDHANSHU KUMAR <p>आरम्भ (The Beginning) एक आध्यात्मिक विज्ञान-गल्प (spiritual science fiction) उपन्यास है जो समय, प्रेम और चेतना के तीनों आयामों को जोड़ता है। यह कथा डॉ. सुधांशु कुमार द्वारा रचित है और इसमें इतिहास, अध्यात्म तथा आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम दिखाई देता है। कहानी का केंद्र एक ही आत्मा के पुरुष-रूपी और स्त्री-रूपी चेतना हैं जो सृष्टि के आरम्भ से हर काल खंड में कभी ऊर्जारूप में तो कभी मानवरूप में पृथ्वी पर आते हैं। आधुनिक अध्यात्म की भाषा में इन्हे जुड़वाँ आत्मा (Twin Flame) कहा जाता हैं, एक दिव्य-पुरुष (Divine Masculine) और दूसरा दिव्य-स्त्री (Divine Feminine) रूप—जो अनादि काल से एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। एक ही आत्मा के ये दोनों रूप अनेक युगों और जन्मों में जन्म लेकर एक-दूसरे की ओर आकर्षित होती रही हैं, परंतु किसी जन्म में कर्मिक बंधन या परिस्थिति के कारण उनका मिलन अधूरा रह जाता है। कुछ जन्म ऐसे भी हैं जब एक ही आत्मा के दोनों मानव शरीर, दिव्य-पुरुष (Divine Masculine) और दूसरा दिव्य-स्त्री (Divine Feminine) रूप एक दूसरे से विवाह करते हैं।</p> |
| title | आरम्भ (The Beginning) |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.17292692 |