| _version_ | 1866901098500980736 |
|---|---|
| author | महेंद्र सिंह |
| author_facet | महेंद्र सिंह |
| contents | <p><span lang="EN-IN">भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था सामाजिक-आर्थिक विकास की आधारभूमि है। ग्रामीण अवसंरचना<strong>-</strong>सड़क, बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसे संसाधनों का मजबूत तंत्र<strong>-</strong>न केवल जीवन-स्तर को बेहतर बनाता है, बल्कि ग्रामीण जनसंख्या को आय के अवसर, बाज़ार तक पहुँच और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करता है। यह शोध पत्र राजस्थान के दो जिलों<strong>-</strong>बीकानेर और हनुमानगढ़<strong>-</strong>का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें यह समझने का प्रयास किया गया है कि अवसंरचनात्मक विकास में हुए अंतर ने दोनों जिलों में गरीबी उन्मूलन की दिशा में क्या प्रभाव डाले। अध्ययन दर्शाता है कि जहाँ हनुमानगढ़ सिंचाई और कृषि अवसंरचना में अग्रणी रहा है, वहीं बीकानेर में जल-संकट, मरुस्थलीय भौगोलिक स्थिति और सीमित कृषि-योग्यता ने ग्रामीण जीवन को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाया है। परिणामस्वरूप दोनों जिलों में गरीबी उन्मूलन की गतिशीलता अलग-अलग दिशाओं में विकसित हुई है।</span></p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_17939534 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | गरीबी उन्मूलन में ग्रामीण अवसंरचना की भूमिका: बीकानेर–हनुमानगढ़ का तुलनात्मक विश्लेषण महेंद्र सिंह ग्रामीण अवसंरचना, गरीबी उन्मूलन, बीकानेर, हनुमानगढ़, सिंचाई, परिवहन, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, तुलनात्मक अध्ययन। <p><span lang="EN-IN">भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था सामाजिक-आर्थिक विकास की आधारभूमि है। ग्रामीण अवसंरचना<strong>-</strong>सड़क, बिजली, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसे संसाधनों का मजबूत तंत्र<strong>-</strong>न केवल जीवन-स्तर को बेहतर बनाता है, बल्कि ग्रामीण जनसंख्या को आय के अवसर, बाज़ार तक पहुँच और सामाजिक सुरक्षा भी प्रदान करता है। यह शोध पत्र राजस्थान के दो जिलों<strong>-</strong>बीकानेर और हनुमानगढ़<strong>-</strong>का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें यह समझने का प्रयास किया गया है कि अवसंरचनात्मक विकास में हुए अंतर ने दोनों जिलों में गरीबी उन्मूलन की दिशा में क्या प्रभाव डाले। अध्ययन दर्शाता है कि जहाँ हनुमानगढ़ सिंचाई और कृषि अवसंरचना में अग्रणी रहा है, वहीं बीकानेर में जल-संकट, मरुस्थलीय भौगोलिक स्थिति और सीमित कृषि-योग्यता ने ग्रामीण जीवन को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाया है। परिणामस्वरूप दोनों जिलों में गरीबी उन्मूलन की गतिशीलता अलग-अलग दिशाओं में विकसित हुई है।</span></p> |
| title | गरीबी उन्मूलन में ग्रामीण अवसंरचना की भूमिका: बीकानेर–हनुमानगढ़ का तुलनात्मक विश्लेषण |
| topic | ग्रामीण अवसंरचना, गरीबी उन्मूलन, बीकानेर, हनुमानगढ़, सिंचाई, परिवहन, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, तुलनात्मक अध्ययन। |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.17939534 |