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Main Author: हर्ाा साहु, अमन ितवारी, रेखा पाठक
Format: Recurso digital
Language:
Published: Zenodo 2025
Online Access:https://doi.org/10.5281/zenodo.18099106
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_version_ 1866901682162499584
author हर्ाा साहु, अमन ितवारी, रेखा पाठक
author_facet हर्ाा साहु, अमन ितवारी, रेखा पाठक
contents <p><span>7 </span><span>वर्ीयष गीर नस्ल की गषय</span><span>, </span><span>तिसने ६ तिन पहले बयषई की थी</span><span>, </span><span>को गषाँव की भैंसोों ने सीोंग मषरकर घषयल कर तियष। िोट मुख्य रूप से आगे के बषएाँ थन पर लगी</span><span>, </span><span>तिससे थन में एक तिद्र बन गयष और वहषाँ से िू ध ररसने लगष। इसके अतिररक्त</span><span>, </span><span>िषाँि के िौरषन यह भी पषयष गयष तक लगभग </span><span>20 </span><span>तिन पुरषनष घषव फषइब्रोतसस के कषरण सख्त हो िुकष थष। गषय को िू ध के नुकसषन और सोंक्रमण के खिरे को िेखिे हुए भषरिीय पशु तितकत्सष अनुसोंधषन सोंस्थषन के पॉलीक्लितनक में लषयष गयष। िषाँि के िौरषन यह पषयष गयष तक थन में बने इस असषमषन्य तिद्र से लगषिषर िू ध कष ररसषव हो रहष है</span><span>, </span><span>तिससे न के वल िू ध की हषतन हो रही थी बक्लि सोंक्रमण </span><span>(Mastitis) </span><span>कष खिरष भी बढ़ गयष थष। गषय हषल ही में ब्यषई होने के कषरण उसकी िुग्ध उत्पषिन क्षमिष उच्च थी</span><span>, </span><span>और यति समय पर उपिषर न तकयष िषिष िो िौथषई कष स्थषयी रूप से नुकसषन होने की सोंभषवनष थी।</span> </p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18099106
institution Zenodo
language
publishDate 2025
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle गाय के थन फिस्टुला का शल्य-प्रबंधन एवं पश्चात देखभाल : एक प्रकरण
हर्ाा साहु, अमन ितवारी, रेखा पाठक
<p><span>7 </span><span>वर्ीयष गीर नस्ल की गषय</span><span>, </span><span>तिसने ६ तिन पहले बयषई की थी</span><span>, </span><span>को गषाँव की भैंसोों ने सीोंग मषरकर घषयल कर तियष। िोट मुख्य रूप से आगे के बषएाँ थन पर लगी</span><span>, </span><span>तिससे थन में एक तिद्र बन गयष और वहषाँ से िू ध ररसने लगष। इसके अतिररक्त</span><span>, </span><span>िषाँि के िौरषन यह भी पषयष गयष तक लगभग </span><span>20 </span><span>तिन पुरषनष घषव फषइब्रोतसस के कषरण सख्त हो िुकष थष। गषय को िू ध के नुकसषन और सोंक्रमण के खिरे को िेखिे हुए भषरिीय पशु तितकत्सष अनुसोंधषन सोंस्थषन के पॉलीक्लितनक में लषयष गयष। िषाँि के िौरषन यह पषयष गयष तक थन में बने इस असषमषन्य तिद्र से लगषिषर िू ध कष ररसषव हो रहष है</span><span>, </span><span>तिससे न के वल िू ध की हषतन हो रही थी बक्लि सोंक्रमण </span><span>(Mastitis) </span><span>कष खिरष भी बढ़ गयष थष। गषय हषल ही में ब्यषई होने के कषरण उसकी िुग्ध उत्पषिन क्षमिष उच्च थी</span><span>, </span><span>और यति समय पर उपिषर न तकयष िषिष िो िौथषई कष स्थषयी रूप से नुकसषन होने की सोंभषवनष थी।</span> </p>
title गाय के थन फिस्टुला का शल्य-प्रबंधन एवं पश्चात देखभाल : एक प्रकरण
url https://doi.org/10.5281/zenodo.18099106