भारतीय राजनीति में मुस्लिम भागीदारी : उपलब्धियाँ, बाधाएँ और भविष्य की दिशा
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Zenodo
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| Auteurs principaux: | , |
|---|---|
| Format: | Recurso digital |
| Publié: |
Zenodo
2026
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| _version_ | 1866901794554118144 |
|---|---|
| author | शेख मोईन शेख नईम अहमद, रईस |
| author_facet | शेख मोईन शेख नईम अहमद, रईस |
| contents | <p><em><span>भारत ने स्वतंत्रता के बाद एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के तौर पर राजनीतिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं तथा शासन व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं। दशकों की इस परिवर्तनशील यात्रा में विभिन्न समुदायों की राजनीतिक भागीदारी भारत के अर्जित लोकतंत्र की सफलता तथा सीमाओं दोनों को उजागर करती है। भारत की एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी स्वतंत्रता के बाद देश के लोकतांत्रिक विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक रही है। प्रस्तुत शोधपत्र स्वतंत्रता के पश्चात मुसलमानों की भारतीय संसद में भागीदारी का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि संवैधानिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक ढांचे के विद्यमान होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी कई सामाजिक, आर्थिक तथा संस्थागत कारकों से प्रभावित रही है। साथ ही, कुछ ऐतिहासिक उपलब्धियों तथा उभरती संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है, जो निकट भविष्य में और ज़्यादा समावेशी लोकतंत्र की दिशा में संकेत करती हैं।</span></em></p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18169778 |
| institution | Zenodo |
| language | |
| publishDate | 2026 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | भारतीय राजनीति में मुस्लिम भागीदारी : उपलब्धियाँ, बाधाएँ और भविष्य की दिशा शेख मोईन शेख नईम अहमद, रईस लोकतंत्र, मुस्लिम प्रतिनिधित्व, स्वतंत्र भारत का राजनीतिक रूपांतरण, समावेशी प्रतिनिधित्व <p><em><span>भारत ने स्वतंत्रता के बाद एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के तौर पर राजनीतिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं तथा शासन व्यवस्था में अहम बदलाव किए हैं। दशकों की इस परिवर्तनशील यात्रा में विभिन्न समुदायों की राजनीतिक भागीदारी भारत के अर्जित लोकतंत्र की सफलता तथा सीमाओं दोनों को उजागर करती है। भारत की एक महत्वपूर्ण अल्पसंख्यक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी स्वतंत्रता के बाद देश के लोकतांत्रिक विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक रही है। प्रस्तुत शोधपत्र स्वतंत्रता के पश्चात मुसलमानों की भारतीय संसद में भागीदारी का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है। प्रस्तुत अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि संवैधानिक अधिकारों तथा लोकतांत्रिक ढांचे के विद्यमान होने के बावजूद मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी कई सामाजिक, आर्थिक तथा संस्थागत कारकों से प्रभावित रही है। साथ ही, कुछ ऐतिहासिक उपलब्धियों तथा उभरती संभावनाओं को भी रेखांकित किया गया है, जो निकट भविष्य में और ज़्यादा समावेशी लोकतंत्र की दिशा में संकेत करती हैं।</span></em></p> |
| title | भारतीय राजनीति में मुस्लिम भागीदारी : उपलब्धियाँ, बाधाएँ और भविष्य की दिशा |
| topic | लोकतंत्र, मुस्लिम प्रतिनिधित्व, स्वतंत्र भारत का राजनीतिक रूपांतरण, समावेशी प्रतिनिधित्व |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.18169778 |