महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व एंव कृतित्व का मूल्यांकन

Fuente: Zenodo
Saved in:
Bibliographic Details
Main Author: डाॅ. जय सिंह यादव, सुनीता गुर्जर
Format: Recurso digital
Language:Hindi
Published: Zenodo 2025
Online Access:
Tags: Add Tag
No Tags, Be the first to tag this record!
_version_ 1866902010679263232
author डाॅ. जय सिंह यादव, सुनीता गुर्जर
author_facet डाॅ. जय सिंह यादव, सुनीता गुर्जर
contents <p>श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। महादेवी वर्मा के पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा और माता का नाम श्रीमती हेमरानी वर्मा था। इनके माता पिता दोनों ही शिक्षा-प्रेमी थे। महादेवीजी वर्मा के नाना ब्रजभाषा के कवि थे और ब्रजभाषा में ही काव्य-रचना करते थे, इसी कारण बाल्यकाल से ही महादेवी को भी कविता लिखने की रुचि उत्पन्न हो गई।<br>महादेवी वर्मा जी की प्रारंभिक शिक्षा इन्दौर में हुई और साथ में ही उन्हें चित्रकला व संगीत की शिक्षा भी दी गई। महादेवी की माता एक विदुषी महिला थी उन्हें संस्कृत और हिन्दी का अच्छा ज्ञान था और वह धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। इन्होने ही महादेवी को तुलसी दास, सूर दास और मीरा का साहित्य पढ़ाया। पारिवारिक माहौल के कारण महादेवीजी में बचपन से ही कविता करने की रुचि थी। वे अपनी माता द्वारा रचित पदों में अपनी ओर से कुछ कड़ियाँ जोड़ दिया करती थीं। वे स्वतंत्र रूप से तुकबंदियाँ करती थीं। मात्र 7 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया था। </p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18312433
institution Zenodo
language hin
publishDate 2025
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व एंव कृतित्व का मूल्यांकन
डाॅ. जय सिंह यादव, सुनीता गुर्जर
<p>श्रीमती महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च, 1907 को फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। महादेवी वर्मा के पिता का नाम श्री गोविन्द प्रसाद वर्मा और माता का नाम श्रीमती हेमरानी वर्मा था। इनके माता पिता दोनों ही शिक्षा-प्रेमी थे। महादेवीजी वर्मा के नाना ब्रजभाषा के कवि थे और ब्रजभाषा में ही काव्य-रचना करते थे, इसी कारण बाल्यकाल से ही महादेवी को भी कविता लिखने की रुचि उत्पन्न हो गई।<br>महादेवी वर्मा जी की प्रारंभिक शिक्षा इन्दौर में हुई और साथ में ही उन्हें चित्रकला व संगीत की शिक्षा भी दी गई। महादेवी की माता एक विदुषी महिला थी उन्हें संस्कृत और हिन्दी का अच्छा ज्ञान था और वह धार्मिक प्रवृत्ति की थीं। इन्होने ही महादेवी को तुलसी दास, सूर दास और मीरा का साहित्य पढ़ाया। पारिवारिक माहौल के कारण महादेवीजी में बचपन से ही कविता करने की रुचि थी। वे अपनी माता द्वारा रचित पदों में अपनी ओर से कुछ कड़ियाँ जोड़ दिया करती थीं। वे स्वतंत्र रूप से तुकबंदियाँ करती थीं। मात्र 7 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया था। </p>
title महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व एंव कृतित्व का मूल्यांकन
url https://doi.org/10.5281/zenodo.18312433