महादेवी वर्मा के काव्य में दर्षन एवं भावपक्ष की प्रासंगिकता

Fuente: Zenodo
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Autore principale: डाॅ. जय सिंह यादव,सुनीता गुर्जर
Natura: Recurso digital
Lingua:hindi
Pubblicazione: Zenodo 2025
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author डाॅ. जय सिंह यादव,सुनीता गुर्जर
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contents <p>महादेवी वर्मा की काव्य रचनाएँ दर्शन, रहस्य, वेदना, करूणा और प्रतीकों की ऐसी दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ छायावादी काव्य संस्कारों का चरम रूप विद्यमान है। उनकी कविता में आत्मानुभूति की गहराई है और भटके हुए पथिकों के लिए दिशा निर्देश भी। <br>महादेवी वर्मा अपने काव्य साहित्य में एक वृहत्तर मानवीय संवेदना के भाव को प्रस्तुत करती हैं, उनके काव्य साहित्य में मूल्यगत चिंताएँ हैं, पर उन्हांेने दर्शन बघारने का, उपदेशक बनने या फतवा देने की भूल नहंी की और इसलएि वे सर्जन की लम्बी यात्रा कर सकीं, सार्थक, ईमानदार, निर्मल यात्रा जिसकी सीमांए हो सकती हैं, पर सार्थकता जगजाहिर और किसी भी दौर में यह निःसंकोच कहा जायेगा कि उनके काव्य साहित्य में एक पथरेखा जिस पर एक प्रतिभा निर्भीक भाव से, पूरे आत्मविश्वास के साथ चलती रही।</p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18312831
institution Zenodo
language hin
publishDate 2025
publisher Zenodo
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spellingShingle महादेवी वर्मा के काव्य में दर्षन एवं भावपक्ष की प्रासंगिकता
डाॅ. जय सिंह यादव,सुनीता गुर्जर
<p>महादेवी वर्मा की काव्य रचनाएँ दर्शन, रहस्य, वेदना, करूणा और प्रतीकों की ऐसी दुनिया में ले जाती हैं, जहाँ छायावादी काव्य संस्कारों का चरम रूप विद्यमान है। उनकी कविता में आत्मानुभूति की गहराई है और भटके हुए पथिकों के लिए दिशा निर्देश भी। <br>महादेवी वर्मा अपने काव्य साहित्य में एक वृहत्तर मानवीय संवेदना के भाव को प्रस्तुत करती हैं, उनके काव्य साहित्य में मूल्यगत चिंताएँ हैं, पर उन्हांेने दर्शन बघारने का, उपदेशक बनने या फतवा देने की भूल नहंी की और इसलएि वे सर्जन की लम्बी यात्रा कर सकीं, सार्थक, ईमानदार, निर्मल यात्रा जिसकी सीमांए हो सकती हैं, पर सार्थकता जगजाहिर और किसी भी दौर में यह निःसंकोच कहा जायेगा कि उनके काव्य साहित्य में एक पथरेखा जिस पर एक प्रतिभा निर्भीक भाव से, पूरे आत्मविश्वास के साथ चलती रही।</p>
title महादेवी वर्मा के काव्य में दर्षन एवं भावपक्ष की प्रासंगिकता
url https://doi.org/10.5281/zenodo.18312831