| _version_ | 1866901243350220800 |
|---|---|
| author | डॉ॰ जितेंद्र कुमार द्विवेदी |
| author_facet | डॉ॰ जितेंद्र कुमार द्विवेदी |
| contents | <p>सार: कालिदास रचित अभिज्ञानशाकुन्तलम् संस्कृत साहित्य की अमर कृति है, जिसमें काव्यात्मक सौन्दर्य, नाट्यकला, रस-सिद्धान्त, अलंकार, प्रकृति-चित्रण तथा मानव-भावनाओं का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य अभिज्ञान शाकुन्तलम् के साहित्यिक सौन्दर्य एवं काव्यगत विशेषताओं का विश्लेषण करना है। इस अध्ययन में काव्य-रूप, रस, अलंकार, भाषा-शैली, नाट्य-तत्व, प्रकृति-चित्रण तथा चरित्र-चित्रण के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि यह ग्रंथ भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा में क्यों श्रेष्ठ माना जाता है। </p> <p>मुख्य शब्द: कालिदास, अभिज्ञानशाकुन्तलम्, साहित्यिक सौन्दर्य, काव्यगत तत्व, रस सिद्धान्त।</p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18420289 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | अभिज्ञानशाकुन्तलम् में साहित्यिक सौन्दर्य एवं काव्यगत विश्लेषण डॉ॰ जितेंद्र कुमार द्विवेदी <p>सार: कालिदास रचित अभिज्ञानशाकुन्तलम् संस्कृत साहित्य की अमर कृति है, जिसमें काव्यात्मक सौन्दर्य, नाट्यकला, रस-सिद्धान्त, अलंकार, प्रकृति-चित्रण तथा मानव-भावनाओं का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य अभिज्ञान शाकुन्तलम् के साहित्यिक सौन्दर्य एवं काव्यगत विशेषताओं का विश्लेषण करना है। इस अध्ययन में काव्य-रूप, रस, अलंकार, भाषा-शैली, नाट्य-तत्व, प्रकृति-चित्रण तथा चरित्र-चित्रण के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि यह ग्रंथ भारतीय काव्यशास्त्र की परंपरा में क्यों श्रेष्ठ माना जाता है। </p> <p>मुख्य शब्द: कालिदास, अभिज्ञानशाकुन्तलम्, साहित्यिक सौन्दर्य, काव्यगत तत्व, रस सिद्धान्त।</p> |
| title | अभिज्ञानशाकुन्तलम् में साहित्यिक सौन्दर्य एवं काव्यगत विश्लेषण |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.18420289 |