सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) : विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी माध्यम
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Zenodo
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| Autore principale: | |
|---|---|
| Natura: | Recurso digital |
| Lingua: | hindi |
| Pubblicazione: |
Zenodo
2025
|
| Accesso online: | |
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| _version_ | 1866901098481057792 |
|---|---|
| author | डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्त |
| author_facet | डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्त |
| contents | <p>सार:- वर्तमान समय में विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली मुख्यतः परीक्षा-केन्द्रित रही है, जिसमें विद्यार्थी की स्मरण शक्ति को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि उसके सर्वांगीण विकास के अन्य महत्वपूर्ण पक्षों की उपेक्षा हो जाती है। ऐसी स्थिति में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (<span lang="EN-US">Continuous and Comprehensive Evaluation, CCE</span>) प्रणाली एक प्रभावी एवं व्यवहारिक विकल्प के रूप में सामने आई है।<br>CCE का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षिक, सह-शैक्षिक तथा भावनात्मक विकास का सतत एवं व्यापक रूप से आकलन करना है। यह प्रणाली न केवल अधिगम प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखती है, बल्कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक बालकेन्द्रित, लचीला एवं रुचिपूर्ण भी बनाती है। सतत मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों की कमजोरियों की समय रहते पहचान कर सुधारात्मक शिक्षण संभव हो पाता है, वहीं व्यापक मूल्यांकन द्वारा उनके व्यक्तित्व, अभिरुचि, अभिवृत्ति, सामाजिक व्यवहार एवं नैतिक मूल्यों का समुचित विकास किया जाता है।<br>प्रस्तुत शोध पत्र में CCE की अवधारणा, उसके प्रमुख घटकों तथा विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार में उसकी भूमिका का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली विद्यार्थियों में परीक्षा भय को कम करने, सीखने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः कहा जा सकता है कि CCE विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी माध्यम है। </p> <p>मुख्य शब्द:- सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, CCE, विद्यालयी शिक्षा, गुणवत्ता सुधार, मूल्यांकन प्रणाली, सर्वांगीण विकास।</p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18481759 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) : विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी माध्यम डॉ० सत्येन्द्र कुमार गुप्त <p>सार:- वर्तमान समय में विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधार एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभरकर सामने आया है। पारंपरिक मूल्यांकन प्रणाली मुख्यतः परीक्षा-केन्द्रित रही है, जिसमें विद्यार्थी की स्मरण शक्ति को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि उसके सर्वांगीण विकास के अन्य महत्वपूर्ण पक्षों की उपेक्षा हो जाती है। ऐसी स्थिति में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (<span lang="EN-US">Continuous and Comprehensive Evaluation, CCE</span>) प्रणाली एक प्रभावी एवं व्यवहारिक विकल्प के रूप में सामने आई है।<br>CCE का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों के शैक्षिक, सह-शैक्षिक तथा भावनात्मक विकास का सतत एवं व्यापक रूप से आकलन करना है। यह प्रणाली न केवल अधिगम प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों की प्रगति पर निरंतर निगरानी रखती है, बल्कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक बालकेन्द्रित, लचीला एवं रुचिपूर्ण भी बनाती है। सतत मूल्यांकन के माध्यम से विद्यार्थियों की कमजोरियों की समय रहते पहचान कर सुधारात्मक शिक्षण संभव हो पाता है, वहीं व्यापक मूल्यांकन द्वारा उनके व्यक्तित्व, अभिरुचि, अभिवृत्ति, सामाजिक व्यवहार एवं नैतिक मूल्यों का समुचित विकास किया जाता है।<br>प्रस्तुत शोध पत्र में CCE की अवधारणा, उसके प्रमुख घटकों तथा विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार में उसकी भूमिका का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि सतत एवं व्यापक मूल्यांकन प्रणाली विद्यार्थियों में परीक्षा भय को कम करने, सीखने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने तथा शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अतः कहा जा सकता है कि CCE विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी माध्यम है। </p> <p>मुख्य शब्द:- सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, CCE, विद्यालयी शिक्षा, गुणवत्ता सुधार, मूल्यांकन प्रणाली, सर्वांगीण विकास।</p> |
| title | सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) : विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी माध्यम |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.18481759 |