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Auteurs principaux: अनामिका अवस्थी, प्रो.एन.एल.मिश्रा
Format: Recurso digital
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Publié: Zenodo 2026
Accès en ligne:https://doi.org/10.5281/zenodo.18510277
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_version_ 1866901105884004352
author अनामिका अवस्थी
प्रो.एन.एल.मिश्रा
author_facet अनामिका अवस्थी
प्रो.एन.एल.मिश्रा
contents <p>सारांश<br>राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, देश की शैक्षिक संरचना में परिवर्तन के साथ-साथ देश की सुदृढ़ता की कामना करती है, किंतु मातृभाषा में शिक्षा, बहुभाषिकता, भारतीय ज्ञान परम्परा व कौशल विकास को केन्द्र में रखते हुये रोजगार व वैश्वीकरण की ओर अग्रसित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भाषाई द्वंद्व व रोजगार के अवसर से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़ी करती है। मातृभाषा में शिक्षा निश्चित रूप से विद्यार्थियों के बौद्धिक व भावनात्मक स्तर पर बल देती है किंतु यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो रोजगार प्राप्ति हेतु अंगे्रजी जैसी वैश्विक भाषाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसलिये यह भाषाई द्वंद्व भारत जैसे बहुभाषी देश के लिये एक बड़ी चुनौती हो जाती है।</p> <p>प्रस्तुत शोध पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख बिंदुओं, मातृभाषा पर आधारित शिक्षा की चुनौतियों, कौशल विकास व भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता एवं वैश्वीकरण के कारण उत्पन्न भाषाई अवरोध और सनातन संस्कृति संरक्षण तथा सांस्कृतिक पलायन जैसी प्रमुख समस्या पर संक्षिप्त विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है।</p> <p>परिणामतः यह नीति तभी सफल हो सकती है जब वर्तमान की शिक्षा प्रणाली मातृभाषा एव वैश्विक भाषाओं के बीच सामंजस्य व संतुलन स्थापित कर सके, जिससे विद्यार्थी अपनी संस्कृति को ग्रहण व संरक्षित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिये तैयार हो सके। <br>की-वर्ड्स: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भाषाई द्वंद्व, कौशल विकास, वैश्वीकरण, चुनौतियाँ</p>
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id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18510277
institution Zenodo
language
publishDate 2026
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भाषाई द्वंद्व और रोजगार
अनामिका अवस्थी
प्रो.एन.एल.मिश्रा
<p>सारांश<br>राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, देश की शैक्षिक संरचना में परिवर्तन के साथ-साथ देश की सुदृढ़ता की कामना करती है, किंतु मातृभाषा में शिक्षा, बहुभाषिकता, भारतीय ज्ञान परम्परा व कौशल विकास को केन्द्र में रखते हुये रोजगार व वैश्वीकरण की ओर अग्रसित राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भाषाई द्वंद्व व रोजगार के अवसर से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़ी करती है। मातृभाषा में शिक्षा निश्चित रूप से विद्यार्थियों के बौद्धिक व भावनात्मक स्तर पर बल देती है किंतु यदि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो रोजगार प्राप्ति हेतु अंगे्रजी जैसी वैश्विक भाषाओं का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हो जाता है। इसलिये यह भाषाई द्वंद्व भारत जैसे बहुभाषी देश के लिये एक बड़ी चुनौती हो जाती है।</p> <p>प्रस्तुत शोध पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रमुख बिंदुओं, मातृभाषा पर आधारित शिक्षा की चुनौतियों, कौशल विकास व भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता एवं वैश्वीकरण के कारण उत्पन्न भाषाई अवरोध और सनातन संस्कृति संरक्षण तथा सांस्कृतिक पलायन जैसी प्रमुख समस्या पर संक्षिप्त विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है।</p> <p>परिणामतः यह नीति तभी सफल हो सकती है जब वर्तमान की शिक्षा प्रणाली मातृभाषा एव वैश्विक भाषाओं के बीच सामंजस्य व संतुलन स्थापित कर सके, जिससे विद्यार्थी अपनी संस्कृति को ग्रहण व संरक्षित करने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिये तैयार हो सके। <br>की-वर्ड्स: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भाषाई द्वंद्व, कौशल विकास, वैश्वीकरण, चुनौतियाँ</p>
title राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, भाषाई द्वंद्व और रोजगार
url https://doi.org/10.5281/zenodo.18510277