पासी दलित साहित्य का समाजशास्त्रीय विश्लेषण पेज नं0 50-56

Fuente: Zenodo
Guardado en:
Detalles Bibliográficos
Autor principal: Tiwari, Shweta
Formato: Recurso digital
Lenguaje:hindi
Publicado: Zenodo 2014
Materias:
Acceso en línea:
Etiquetas: Agregar Etiqueta
Sin Etiquetas, Sea el primero en etiquetar este registro!
_version_ 1866901722168819712
author Tiwari, Shweta
author_facet Tiwari, Shweta
contents <p>समाज में लैंगिक भूमिकाएँ और रूढ़ियाँ मानव व्यवहार तथा सामाजिक संरचना को गहराई से प्रभावित करती हैं। यह अध्ययन इस बात का विश्लेषण करता है कि परिवार, संस्कृति और सामाजिक संस्थाएँ किस प्रकार पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग भूमिकाएँ निर्धारित करती हैं। बचपन से ही समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से लड़कों और लड़कियों में अलग-अलग अपेक्षाएँ, व्यवहार और जिम्मेदारियाँ विकसित की जाती हैं। इन लैंगिक रूढ़ियों का प्रभाव शिक्षा, रोजगार, पारिवारिक जीवन और सामाजिक संबंधों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि समय के साथ सामाजिक परिवर्तन के कारण इन भूमिकाओं में कुछ बदलाव आए हैं, फिर भी कई पारंपरिक धारणाएँ आज भी समाज में मौजूद हैं। इसलिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और रूढ़िवादी धारणाओं को कम करने के लिए जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन आवश्यक हैं।</p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_18894117
institution Zenodo
language hin
publishDate 2014
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle पासी दलित साहित्य का समाजशास्त्रीय विश्लेषण पेज नं0 50-56
Tiwari, Shweta
लैंगिक भूमिकाएँ, लैंगिक रूढ़ियाँ, समाजीकरण, परिवार, लैंगिक समानता, सामाजिक संरचना
<p>समाज में लैंगिक भूमिकाएँ और रूढ़ियाँ मानव व्यवहार तथा सामाजिक संरचना को गहराई से प्रभावित करती हैं। यह अध्ययन इस बात का विश्लेषण करता है कि परिवार, संस्कृति और सामाजिक संस्थाएँ किस प्रकार पुरुष और महिला के लिए अलग-अलग भूमिकाएँ निर्धारित करती हैं। बचपन से ही समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से लड़कों और लड़कियों में अलग-अलग अपेक्षाएँ, व्यवहार और जिम्मेदारियाँ विकसित की जाती हैं। इन लैंगिक रूढ़ियों का प्रभाव शिक्षा, रोजगार, पारिवारिक जीवन और सामाजिक संबंधों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। अध्ययन यह भी दर्शाता है कि समय के साथ सामाजिक परिवर्तन के कारण इन भूमिकाओं में कुछ बदलाव आए हैं, फिर भी कई पारंपरिक धारणाएँ आज भी समाज में मौजूद हैं। इसलिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और रूढ़िवादी धारणाओं को कम करने के लिए जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन आवश्यक हैं।</p>
title पासी दलित साहित्य का समाजशास्त्रीय विश्लेषण पेज नं0 50-56
topic लैंगिक भूमिकाएँ, लैंगिक रूढ़ियाँ, समाजीकरण, परिवार, लैंगिक समानता, सामाजिक संरचना
url https://doi.org/10.5281/zenodo.18894117