बिहार के अतिपिछड़े मुसलमानों का सच

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1. Verfasser: शगुफ्ता, ताज
Format: Recurso digital
Sprache:Hindi
Veröffentlicht: Zenodo 2026
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author शगुफ्ता, ताज
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contents <p>भारतीय संविधान की मूल भावना सामाजिक समानता है। जिसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावन में भी किया है। सामाजिक समानता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ही ‘आरक्षण’ की व्यवस्था की गयी। आरक्षण का अर्थ यह है कि कोई पद भविष्य में किसी वर्ग विशेष के लिए पहले से ही निश्चित रूप से रख दिया जाता है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण का अर्थ यह है कि सरकारी कार्यालय या संस्थान में कोई पद रिक्त होगा तो अमुक पद किसी जाति या समुदाय या वर्ग के लिए सुरक्षित रहेगा। इसी प्रकार विधान सभा या सांसद में प्रतिनिधियों को चुनने की व्यवस्था रहती है। जिस जगह या जाति के लिए जो पद सुरिक्षत रहती है उस जगह या वर्ग का व्यक्ति उस पद के लिए चुना जाता है।</p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_19123543
institution Zenodo
language hin
publishDate 2026
publisher Zenodo
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spellingShingle बिहार के अतिपिछड़े मुसलमानों का सच
शगुफ्ता, ताज
<p>भारतीय संविधान की मूल भावना सामाजिक समानता है। जिसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावन में भी किया है। सामाजिक समानता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ही ‘आरक्षण’ की व्यवस्था की गयी। आरक्षण का अर्थ यह है कि कोई पद भविष्य में किसी वर्ग विशेष के लिए पहले से ही निश्चित रूप से रख दिया जाता है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण का अर्थ यह है कि सरकारी कार्यालय या संस्थान में कोई पद रिक्त होगा तो अमुक पद किसी जाति या समुदाय या वर्ग के लिए सुरक्षित रहेगा। इसी प्रकार विधान सभा या सांसद में प्रतिनिधियों को चुनने की व्यवस्था रहती है। जिस जगह या जाति के लिए जो पद सुरिक्षत रहती है उस जगह या वर्ग का व्यक्ति उस पद के लिए चुना जाता है।</p>
title बिहार के अतिपिछड़े मुसलमानों का सच
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