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| Main Author: | |
|---|---|
| Format: | Recurso digital |
| Language: | Hindi |
| Published: |
Zenodo
2026
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| Online Access: | https://doi.org/10.5281/zenodo.19123543 |
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Table of Contents:
- <p>भारतीय संविधान की मूल भावना सामाजिक समानता है। जिसका उल्लेख संविधान की प्रस्तावन में भी किया है। सामाजिक समानता के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ही ‘आरक्षण’ की व्यवस्था की गयी। आरक्षण का अर्थ यह है कि कोई पद भविष्य में किसी वर्ग विशेष के लिए पहले से ही निश्चित रूप से रख दिया जाता है। सरकारी नौकरियों में आरक्षण का अर्थ यह है कि सरकारी कार्यालय या संस्थान में कोई पद रिक्त होगा तो अमुक पद किसी जाति या समुदाय या वर्ग के लिए सुरक्षित रहेगा। इसी प्रकार विधान सभा या सांसद में प्रतिनिधियों को चुनने की व्यवस्था रहती है। जिस जगह या जाति के लिए जो पद सुरिक्षत रहती है उस जगह या वर्ग का व्यक्ति उस पद के लिए चुना जाता है।</p>