आधुनिक हिन्दी साहित्य के द्विवेदी युगीन प्रबंध काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा: पुनर्पाठ
Fuente:
Zenodo
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| Autore principale: | |
|---|---|
| Natura: | Recurso digital |
| Pubblicazione: |
Zenodo
2026
|
| Accesso online: | |
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| _version_ | 1866901089110982656 |
|---|---|
| author | देसाई, जयश्रीबेन एस |
| author_facet | देसाई, जयश्रीबेन एस |
| contents | <p><strong><em><span>सारांश</span></em></strong></p> <p><em><span><span> </span>आधुनिक हिन्दी साहित्य का द्विवेदी युग (1900–1920) हिन्दी काव्य-धारा में राष्ट्रीय चेतना, नैतिक पुनर्जागरण और सांस्कृतिक अस्मिता के पुनर्स्थापन का युग माना जाता है। इस काल कई प्रबंध काव्य लिखे गए, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर - वेदांत, गीता-दर्शन, रामायण, महाभारत की नीतिपरक दृष्टि, लोकमंगल की अवधारणा तथा राष्ट्रीय स्वाधीनता का भाव समाहित है। और इसमे भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिकता का सशक्त पुनर्पाठ मिलता है। महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादकीय नेतृत्व में सरस्वती पत्रिका ने साहित्य को नैतिकता, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीयता से जोडने का प्रयास किया है। मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ तथा रामनरेश त्रिपाठी जैसे कवियों ने प्रबंध काव्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में रूपायित किया। प्रस्तुत शोध-प्रपत्र में द्विवेदी युगीन प्रबंध काव्य यानी खंडकाव्य एवं महाकाव्य में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा के तत्त्वों का विश्लेषण किया गया है।</span></em></p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_19202602 |
| institution | Zenodo |
| language | |
| publishDate | 2026 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | आधुनिक हिन्दी साहित्य के द्विवेदी युगीन प्रबंध काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा: पुनर्पाठ देसाई, जयश्रीबेन एस <p><strong><em><span>सारांश</span></em></strong></p> <p><em><span><span> </span>आधुनिक हिन्दी साहित्य का द्विवेदी युग (1900–1920) हिन्दी काव्य-धारा में राष्ट्रीय चेतना, नैतिक पुनर्जागरण और सांस्कृतिक अस्मिता के पुनर्स्थापन का युग माना जाता है। इस काल कई प्रबंध काव्य लिखे गए, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर - वेदांत, गीता-दर्शन, रामायण, महाभारत की नीतिपरक दृष्टि, लोकमंगल की अवधारणा तथा राष्ट्रीय स्वाधीनता का भाव समाहित है। और इसमे भारतीय ज्ञान परंपरा एवं सांस्कृतिकता का सशक्त पुनर्पाठ मिलता है। महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपादकीय नेतृत्व में सरस्वती पत्रिका ने साहित्य को नैतिकता, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीयता से जोडने का प्रयास किया है। मैथिलीशरण गुप्त, अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ तथा रामनरेश त्रिपाठी जैसे कवियों ने प्रबंध काव्य के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में रूपायित किया। प्रस्तुत शोध-प्रपत्र में द्विवेदी युगीन प्रबंध काव्य यानी खंडकाव्य एवं महाकाव्य में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा के तत्त्वों का विश्लेषण किया गया है।</span></em></p> |
| title | आधुनिक हिन्दी साहित्य के द्विवेदी युगीन प्रबंध काव्य में भारतीय ज्ञान परंपरा: पुनर्पाठ |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.19202602 |