स्वामी दयानंद सरस्वती: वैदिक ज्ञान एवं सत्यार्थ प्रकाश

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Autore principale: डॉ सिम्मी सिंह
Natura: Recurso digital
Pubblicazione: Zenodo 2026
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author डॉ सिम्मी सिंह
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contents <p><span lang="HI">स्वामी दयानंद सरस्वती </span><span lang="EN-US">19</span><span lang="HI">वीं शताब्दी के महान समाज सुधारक</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">धर्म चिंतक तथा राष्ट्रीय पुनर्जागरण के प्रमुख प्रवर्तक थे। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त अंधविश्वास</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">रूढ़िवाद</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">जातिगत भेदभाव</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्त्री-असमानता तथा धार्मिक कुरीतियों का वैदिक आधार पर तार्किक खंडन किया। प्रस्तुत शोध पत्र में स्वामी दयानंद सरस्वती के वैदिक ज्ञान</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">उनके ग्रंथ</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">सत्यार्थ प्रकाश</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">तथा आर्य समाज के माध्यम से किए गए सामाजिक</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">धार्मिक एवं शैक्षिक सुधारों का विश्लेषण किया गया है। दयानंद सरस्वती ने वेदों को ज्ञान का मूल स्रोत मानते हुए एकेश्वरवाद</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">वर्ण व्यवस्था के गुण-कर्म आधारित सिद्धांत</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्त्री-पुरुष समानता</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">शिक्षा का सार्वभौमिक अधिकार तथा सामाजिक समरसता पर बल दिया। उन्होंने बाल विवाह</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">बहुविवाह</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">पर्दा प्रथा</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">अस्पृश्यता तथा जन्म आधारित जाति व्यवस्था का विरोध करते हुए वैदिक जीवन मूल्यों को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया।</span></p> <p><span lang="HI">सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से उन्होंने धर्म</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए नैतिक एवं तर्कसंगत विचार प्रस्तुत किए। साथ ही उन्होंने हिंदी भाषा</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्वदेशी</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्वराज और राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित कर भारतीय पुनर्जागरण को नई दिशा प्रदान की। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि स्वामी दयानंद सरस्वती के विचार आधुनिक भारतीय समाज</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में अत्यंत प्रासंगिक हैं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।</span></p>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_19333647
institution Zenodo
language
publishDate 2026
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle स्वामी दयानंद सरस्वती: वैदिक ज्ञान एवं सत्यार्थ प्रकाश
डॉ सिम्मी सिंह
स्वामी दयानंद सरस्वती
सत्यार्थ प्रकाश
<p><span lang="HI">स्वामी दयानंद सरस्वती </span><span lang="EN-US">19</span><span lang="HI">वीं शताब्दी के महान समाज सुधारक</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">धर्म चिंतक तथा राष्ट्रीय पुनर्जागरण के प्रमुख प्रवर्तक थे। उन्होंने भारतीय समाज में व्याप्त अंधविश्वास</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">रूढ़िवाद</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">जातिगत भेदभाव</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्त्री-असमानता तथा धार्मिक कुरीतियों का वैदिक आधार पर तार्किक खंडन किया। प्रस्तुत शोध पत्र में स्वामी दयानंद सरस्वती के वैदिक ज्ञान</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">उनके ग्रंथ</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">सत्यार्थ प्रकाश</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">तथा आर्य समाज के माध्यम से किए गए सामाजिक</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">धार्मिक एवं शैक्षिक सुधारों का विश्लेषण किया गया है। दयानंद सरस्वती ने वेदों को ज्ञान का मूल स्रोत मानते हुए एकेश्वरवाद</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">वर्ण व्यवस्था के गुण-कर्म आधारित सिद्धांत</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्त्री-पुरुष समानता</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">शिक्षा का सार्वभौमिक अधिकार तथा सामाजिक समरसता पर बल दिया। उन्होंने बाल विवाह</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">बहुविवाह</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">पर्दा प्रथा</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">अस्पृश्यता तथा जन्म आधारित जाति व्यवस्था का विरोध करते हुए वैदिक जीवन मूल्यों को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया।</span></p> <p><span lang="HI">सत्यार्थ प्रकाश के माध्यम से उन्होंने धर्म</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए नैतिक एवं तर्कसंगत विचार प्रस्तुत किए। साथ ही उन्होंने हिंदी भाषा</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्वदेशी</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">स्वराज और राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित कर भारतीय पुनर्जागरण को नई दिशा प्रदान की। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि स्वामी दयानंद सरस्वती के विचार आधुनिक भारतीय समाज</span><span lang="EN-US">, </span><span lang="HI">शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में अत्यंत प्रासंगिक हैं तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त बनाने में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।</span></p>
title स्वामी दयानंद सरस्वती: वैदिक ज्ञान एवं सत्यार्थ प्रकाश
topic स्वामी दयानंद सरस्वती
सत्यार्थ प्रकाश
url https://doi.org/10.5281/zenodo.19333647