समकालीन हिंदी कविता में स्त्री विमर्श: अस्मिता, प्रतिरोध और सौंदर्यशास्त्र

Fuente: Zenodo
Saved in:
Bibliographic Details
Main Author: डॉ पूनम सिंह
Format: Recurso digital
Language:English
Published: Zenodo 2026
Online Access:
Tags: Add Tag
No Tags, Be the first to tag this record!
_version_ 1866901345795047424
author डॉ पूनम सिंह
author_facet डॉ पूनम सिंह
contents यह लेख समकालीन हिंदी कविता के विस्तृत फलक पर स्त्री विमर्श के सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक विकास की समीक्षा करता है। बींसवीं सदी के उत्तरार्ध से लेकर वर्तमान तक हिंदी कविता के पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती देते हुए स्त्री को वस्तुपरकता से मुक्त कर एक सचेतन विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।यह शोध स्त्री के आत्म संघर्ष, देह राजनीति, अस्मिता बोध और वर्चस्ववादी सामाजिक सरंचनाओं के विरुद्ध उभरे 'प्रतिरोध के स्वर' का सूक्ष्म विश्लेषण करता है।साथ ही यह अध्ययन रेखांकित करता है कि कैसे समकालीन कविता ने घरेलू हिंसा, श्रम विभाजन और वर्गीय शोषण के विरुद्ध एक सशक्त विमर्श तैयार किया है।
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_19449135
institution Zenodo
language eng
publishDate 2026
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle समकालीन हिंदी कविता में स्त्री विमर्श: अस्मिता, प्रतिरोध और सौंदर्यशास्त्र
डॉ पूनम सिंह
यह लेख समकालीन हिंदी कविता के विस्तृत फलक पर स्त्री विमर्श के सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक विकास की समीक्षा करता है। बींसवीं सदी के उत्तरार्ध से लेकर वर्तमान तक हिंदी कविता के पितृसत्तात्मक समाज को चुनौती देते हुए स्त्री को वस्तुपरकता से मुक्त कर एक सचेतन विमर्श के केंद्र में स्थापित किया।यह शोध स्त्री के आत्म संघर्ष, देह राजनीति, अस्मिता बोध और वर्चस्ववादी सामाजिक सरंचनाओं के विरुद्ध उभरे 'प्रतिरोध के स्वर' का सूक्ष्म विश्लेषण करता है।साथ ही यह अध्ययन रेखांकित करता है कि कैसे समकालीन कविता ने घरेलू हिंसा, श्रम विभाजन और वर्गीय शोषण के विरुद्ध एक सशक्त विमर्श तैयार किया है।
title समकालीन हिंदी कविता में स्त्री विमर्श: अस्मिता, प्रतिरोध और सौंदर्यशास्त्र
url https://doi.org/10.5281/zenodo.19449135