| _version_ | 1866902148977000448 |
|---|---|
| author | डाॅ. अनुभा पाण्डेय अनुष्का |
| author_facet | डाॅ. अनुभा पाण्डेय अनुष्का |
| contents | <p>प्रस्तावना<br>हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल का आन्दोलन जो समता, समानता, विश्वबन्धुत्व, सर्वजन हिताय, सर्वकल्याणक, प्राणी मात्र का कल्याण, मानवता आदि के उर्वरकों से निसृत था, भक्तिकाल हिन्दी में ‘स्वर्णकाल’ के नाम से जाना जाता है। इस काल के साहित्य में मानव को केन्द्र में रखकर उसके कल्याण के लिए साहित्य लिखा गया। भक्तिकाल के साहित्य ने मानव में छुपी हुई बुराईयों को निकालकर उसका परिमार्जन करने का कार्य किया है और इस कार्य में भक्तिकाल के सन्तों ने अपना अमूल्य योगदान दिया है क्योंकि उन्होंने जनता के सामने अपने स्वयं की पवित्रता, सादा जीवन, आचरण की शुद्धता का आदर्श जनता के सम्मुख प्रकट किया है।<br>मुख्यबिन्दु: भक्तिकाल, समानता, मानवता, सर्वकल्याणक, पवित्रता, आदर्श</p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_19482294 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2026 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | संत रैदास की सामाजिक समरसता, समता एवं सर्वकल्याण विचारधारा की उपादेयता डाॅ. अनुभा पाण्डेय अनुष्का <p>प्रस्तावना<br>हिन्दी साहित्य में भक्तिकाल का आन्दोलन जो समता, समानता, विश्वबन्धुत्व, सर्वजन हिताय, सर्वकल्याणक, प्राणी मात्र का कल्याण, मानवता आदि के उर्वरकों से निसृत था, भक्तिकाल हिन्दी में ‘स्वर्णकाल’ के नाम से जाना जाता है। इस काल के साहित्य में मानव को केन्द्र में रखकर उसके कल्याण के लिए साहित्य लिखा गया। भक्तिकाल के साहित्य ने मानव में छुपी हुई बुराईयों को निकालकर उसका परिमार्जन करने का कार्य किया है और इस कार्य में भक्तिकाल के सन्तों ने अपना अमूल्य योगदान दिया है क्योंकि उन्होंने जनता के सामने अपने स्वयं की पवित्रता, सादा जीवन, आचरण की शुद्धता का आदर्श जनता के सम्मुख प्रकट किया है।<br>मुख्यबिन्दु: भक्तिकाल, समानता, मानवता, सर्वकल्याणक, पवित्रता, आदर्श</p> |
| title | संत रैदास की सामाजिक समरसता, समता एवं सर्वकल्याण विचारधारा की उपादेयता |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.19482294 |