राजस्थान की लोकसंस्कृति में सामाजिक संरचना

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Main Author: डॉ. सोनिया शर्मा
Format: Recurso digital
Language:Hindi
Published: Zenodo 2025
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author डॉ. सोनिया शर्मा
author_facet डॉ. सोनिया शर्मा
contents <h3><span>यह शोध.पत्र राजस्थान की लोकसंस्कृति और उसकी सामाजिक संरचना के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि संस्कृति और समाज एक.दूसरे के पूरक हैं जहाँ संस्कृति समाज के आचार.विचारए जीवन. शैलीएँ परंपराओं और मूल्यों को दिशा प्रदान करती हैं। राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियोंए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा बाहरी प्रभावों से संरक्षित सांस्कृतिक धरोहर ने यहाँ की सामाजिक संरचना को विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया है।</span></h3> <h3><span>इस शोध में भोजन.पद्धतिए वेशभूषाए आभूषणए लोक.मनोरंजनए लोक.साहित्य तथा लोक.उत्सवों के माध्यम से सामाजिक जीवन की संरचना को समझने का प्रयास किया गया है। साथ ही यह भी प्रतिपादित किया गया है कि राजस्थान की लोकसंस्कृति न केवल सांस्कृतिक पहचान का आधार हैए बल्कि सामाजिक एकताए नैतिक मूल्यों और परंपराओं की संरक्षक भी है।</span></h3> <h3><span>अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया है कि राजस्थान की लोकसंस्कृति समाज की आत्मा के रूप में कार्य करती है और सामाजिक संरचना को सुदृढ़ एवं संगठित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</span></h3>
format Recurso digital
id zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_19564330
institution Zenodo
language hin
publishDate 2025
publisher Zenodo
record_format zenodo
spellingShingle राजस्थान की लोकसंस्कृति में सामाजिक संरचना
डॉ. सोनिया शर्मा
राजस्थान, लोकसंस्कृतियाँ, सामाजिक संरचनाएँ, परंपराएँ, लोक.साहित्यए वेशभूषाए आभूषणए लोक.उत्सवए सामाजिक मूल्यए सांस्कृतिक विरासत
<h3><span>यह शोध.पत्र राजस्थान की लोकसंस्कृति और उसकी सामाजिक संरचना के पारस्परिक संबंधों का विश्लेषण करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि संस्कृति और समाज एक.दूसरे के पूरक हैं जहाँ संस्कृति समाज के आचार.विचारए जीवन. शैलीएँ परंपराओं और मूल्यों को दिशा प्रदान करती हैं। राजस्थान की भौगोलिक परिस्थितियोंए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि तथा बाहरी प्रभावों से संरक्षित सांस्कृतिक धरोहर ने यहाँ की सामाजिक संरचना को विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया है।</span></h3> <h3><span>इस शोध में भोजन.पद्धतिए वेशभूषाए आभूषणए लोक.मनोरंजनए लोक.साहित्य तथा लोक.उत्सवों के माध्यम से सामाजिक जीवन की संरचना को समझने का प्रयास किया गया है। साथ ही यह भी प्रतिपादित किया गया है कि राजस्थान की लोकसंस्कृति न केवल सांस्कृतिक पहचान का आधार हैए बल्कि सामाजिक एकताए नैतिक मूल्यों और परंपराओं की संरक्षक भी है।</span></h3> <h3><span>अंततः यह निष्कर्ष निकाला गया है कि राजस्थान की लोकसंस्कृति समाज की आत्मा के रूप में कार्य करती है और सामाजिक संरचना को सुदृढ़ एवं संगठित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।</span></h3>
title राजस्थान की लोकसंस्कृति में सामाजिक संरचना
topic राजस्थान, लोकसंस्कृतियाँ, सामाजिक संरचनाएँ, परंपराएँ, लोक.साहित्यए वेशभूषाए आभूषणए लोक.उत्सवए सामाजिक मूल्यए सांस्कृतिक विरासत
url https://doi.org/10.5281/zenodo.19564330