जयपुर की लोक प्रिय संस्कृति में प्रथम पूज्य गणेश : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
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Zenodo
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| Hauptverfasser: | , |
|---|---|
| Format: | Recurso digital |
| Sprache: | Hindi |
| Veröffentlicht: |
Zenodo
2025
|
| Schlagworte: | |
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| _version_ | 1866901887057395712 |
|---|---|
| author | वन्दना भारद्वाज डॉ. शिल्पी गुप्ता |
| author_facet | वन्दना भारद्वाज डॉ. शिल्पी गुप्ता |
| contents | <p class="MsoNormal"><span>प्रस्तुत शोध पत्र जयपुर के चार प्रमुख गणेश मंदिरों — गढ़ गणेश</span><em><span>, </span></em><span>परकोटा गणेश</span><em><span>, </span></em><span>मोती डूंगरी गणेश और नाहर के गणेश — के ऐतिहासिक</span><em><span>, </span></em><span>धार्मिक एवं लोक-सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करता है। इन मंदिरों की स्थापना</span><em><span>, </span></em><span>स्थापत्य शैली</span><em><span>, </span></em><span>प्रतिमा स्वरूप</span><em><span>, </span></em><span>मान्यताओं एवं लोक परम्पराओं का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोध में मौखिक परम्पराओं</span><em><span>, </span></em><span>लोकगीतों</span><em><span>, </span></em><span>महंतों से साक्षात्कार तथा उपलब्ध लिखित स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक मंदिर की अपनी विशिष्ट लोकआस्था है — गढ़ गणेश विनायक स्वरूप (बिना सूँड) में सम्भवतः भारत में एकमात्र हैं</span><em><span>, </span></em><span>परकोटा गणेश मुखाकृति स्वरूप में विवाह की कामना पूर्ण करते हैं</span><em><span>, </span></em><span>मोती डूंगरी में वाहन पूजन की परम्परा प्रचलित है</span><em><span>, </span></em><span>जबकि नाहर के गणेश तांत्रिक विधि से स्थापित एवं रोजगार-कामना हेतु पूजित हैं। यह शोध युवा पीढ़ी को भारतीय सनातन संस्कृति एवं धार्मिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से लिखित स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।</span></p> |
| format | Recurso digital |
| id | zenodo_https___doi_org_10_5281_zenodo_20254624 |
| institution | Zenodo |
| language | hin |
| publishDate | 2025 |
| publisher | Zenodo |
| record_format | zenodo |
| spellingShingle | जयपुर की लोक प्रिय संस्कृति में प्रथम पूज्य गणेश : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन वन्दना भारद्वाज डॉ. शिल्पी गुप्ता गणेश, जयपुर, लोक-संस्कृति, गढ़ गणेश, परकोटा गणेश, मोती डूंगरी, नाहर के गणेश, लोकआस्था, मंदिर परम्परा, विनायक, तांत्रिक पूजा, राजस्थान, सांस्कृतिक धरोहर, लोकगीत, धार्मिक मान्यताएँ <p class="MsoNormal"><span>प्रस्तुत शोध पत्र जयपुर के चार प्रमुख गणेश मंदिरों — गढ़ गणेश</span><em><span>, </span></em><span>परकोटा गणेश</span><em><span>, </span></em><span>मोती डूंगरी गणेश और नाहर के गणेश — के ऐतिहासिक</span><em><span>, </span></em><span>धार्मिक एवं लोक-सांस्कृतिक महत्व का विश्लेषण करता है। इन मंदिरों की स्थापना</span><em><span>, </span></em><span>स्थापत्य शैली</span><em><span>, </span></em><span>प्रतिमा स्वरूप</span><em><span>, </span></em><span>मान्यताओं एवं लोक परम्पराओं का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। शोध में मौखिक परम्पराओं</span><em><span>, </span></em><span>लोकगीतों</span><em><span>, </span></em><span>महंतों से साक्षात्कार तथा उपलब्ध लिखित स्रोतों का उपयोग किया गया है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक मंदिर की अपनी विशिष्ट लोकआस्था है — गढ़ गणेश विनायक स्वरूप (बिना सूँड) में सम्भवतः भारत में एकमात्र हैं</span><em><span>, </span></em><span>परकोटा गणेश मुखाकृति स्वरूप में विवाह की कामना पूर्ण करते हैं</span><em><span>, </span></em><span>मोती डूंगरी में वाहन पूजन की परम्परा प्रचलित है</span><em><span>, </span></em><span>जबकि नाहर के गणेश तांत्रिक विधि से स्थापित एवं रोजगार-कामना हेतु पूजित हैं। यह शोध युवा पीढ़ी को भारतीय सनातन संस्कृति एवं धार्मिक धरोहर से जोड़ने के उद्देश्य से लिखित स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।</span></p> |
| title | जयपुर की लोक प्रिय संस्कृति में प्रथम पूज्य गणेश : एक विश्लेषणात्मक अध्ययन |
| topic | गणेश, जयपुर, लोक-संस्कृति, गढ़ गणेश, परकोटा गणेश, मोती डूंगरी, नाहर के गणेश, लोकआस्था, मंदिर परम्परा, विनायक, तांत्रिक पूजा, राजस्थान, सांस्कृतिक धरोहर, लोकगीत, धार्मिक मान्यताएँ |
| url | https://doi.org/10.5281/zenodo.20254624 |